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मोदी सरकार महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती, उनकी कथनी और करनी में है अंतर *रंजीत रंजन और कांग्रेस की महिला विधायकों की पत्रकार वार्ता

 मोदी सरकार महिलाओं को आरक्षण नहीं देना चाहती, उनकी कथनी और करनी में है अंतर 

रंजीत रंजन और कांग्रेस की महिला विधायकों की पत्रकार वार्ता

रायपुर। लोकसभा में नारी वंदन विधेयक पेश होने के बाद पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण निरस्त हो गया । इस बारे में बीजेपी ने कांग्रेस को महिला विरोधी बताते हुए उन पर महिलाओ की अनदेखी का आरोप लगाया । वहीं रायपुर  स्थित राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में ए  एआई सी सी की पदाधिकारी रायपुर। लोकसभा में नारी वंदन विधेयक पेश होने के बाद पर्याप्त समर्थन नहीं मिलने के कारण निरस्त हो गया । इस बारे में बीजेपी ने कांग्रेस को महिला विरोधी बताते हुए उन पर महिलाओ की अनदेखी का आरोप लगाया । वहीं रायपुर  स्थित राजीव भवन में आयोजित पत्रकार वार्ता में ए  सी सी की कांग्रेस  एआई सी सी की पदाधिकारी और राज्यसभा सांसद  रंजीत रंजन, पूर्व मंत्री अनिला भेंडिया , और महिला विधायकों  ने कहा की कांग्रेस लोकसभा की वर्तमान संख्या के आधार पर महिला आरक्षण की हिमायती है। लेकिन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पहले परिसीमन कराकर सीट बढ़ाना चाहते है ।जिसका कांग्रेस विरोध कर रही है । उन्होंने कहा कि वे 16 अप्रैल को पेश विधेयक के बारे में स्थिति स्पष्ट करने आई  हुई  है। चूंकि 2023 में महिला वंदन  विधेयक सर्वसम्मति से पास हो चुका था। उस वक़्त उसे लागू करने की   अधिसूचना क्यों जारी नहीं की गई ।   तीन दिन के विशेष सत्र में महिला वंदन बिल को पेश कर चर्चा की गई। यदि बीजेपी परिसीमन की बात नहीं करती तो यह विधेयक सर्वसम्मति से पास  हो जाता मगर   बीजेपी की नीयत और नीति में खोट है। अब महिलाएं उनके झासे में फसने वाली नहीं है  । नारी वंदन विधेयक  2023 में सर्वसम्मति से लोकसभा और राज्यसभा से पास हुआ था ।  यह पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार का ही एजें डा था ।  विपक्ष ने यही मांग की कि सरकार पहले जनगरना कराय। फिर परिसीमन कराए उसके बाद  अधिनियम बनाए  । 2023 के तीन साल बाद जब दो प्रदेश में चुनाव हो रहे है तो बीजेपी को इस बात की याद आती है। बंगाल में चुनाव है तो ये चर्चा हो रही है परिसीमन का बिल आ रहा है ।इसका आधार क्या है।मोदी जी ने  अपने भाषण में कहा था कि वे 33 प्रतिशत आरक्षण ला रहे है। वो भी वर्तमान सीटों पर नहीं बल्कि ये सीट बढ़ा कर । उन्होंने कहा कि यह   उनकी पितृसत्तात्मक सोच को दर्शाता है।विपक्ष को ब्लैक चेक देने की बात कह रहे है।2023 में पास हो चुके बिल  के बारे में  जानकारी महिलाओ को  देना जरूरी है । उसका लाभ लाभ 2029 में भी नहीं मिलेगा यदि परिसीमन का पेंच डाला जाएगा तो । उन्होंने  बीजेपी पर महिलाओ के साथ धोखाधड़ी करने का आरोप लगाया  है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री ने परिसीमन को महिला आरक्षण से क्यों जोड़ दिया । यदि  वर्तमान सीटों पर आरक्षण  लागू करे परिसीमन का पेंच नहीं लगाय तो कांग्रेस जल्द ही अपना समर्थन देगी। मगर बीजेपी की ।कथनी और करनी में अंतर है। वे  महिला विरोधी सरकार है वे नहीं चाहते कि महिलाओ को लाभ मिले। कांग्रेस ने महिलाओं को पंचायत में साशक्त बनाया । पचास प्रतिशत आरक्षण दिया । जब 2023 में ये बिल  पास हो गया तो उस विधेयक को लागू क्यों नहीं किया गया। परिसीमन के पहले वर्तमान सीटों में दिय जाय आरक्षण।543 में 33 फीसदी आरक्षण   केंद्र सरकार महिलाओ को दे । वैसे भी अब महिलाएं उनके झांसे में नहीं फसंने वाली है। उनका कहना है कि इस बारे में वे अब हर विकासखंड और जिलों में पत्रकारवार्ता लेकर बीजेपी की कथनी और करनी के अंतर को जनता को बताएंगे  । प्रधानमंत्री से लेकर मुख्यमंत्री तक झूठ बोल रहे है। भाजपा द्वारा महिला आरक्षण को लेकर लगातार झूठा भ्रम फैलाया जा रहा कि कांग्रेस और विपक्षी दलों ने महिला आरक्षण बिल का समर्थन नहीं किया, इसलिए संसद में बिल पास नहीं हो सका। महिला आरक्षण बिल (नारी शक्ति वंदन अधिनियम 2023) 128 वां संविधान संशोधन सितंबर 2023 में संसद के दोनों सदनों में पारित हो चुका है तथा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू इस पर हस्ताक्षर कर चुकी है तथा यह कानून भी बन चुकी है। भाजपा 2023 के आरक्षण बिल को क्यों लागू नहीं कर रही है? इस बिल के आधार पर तुरंत आरक्षण प्रभावी हो सकता है। भाजपा ने 16 अप्रैल 2026 को जो विधेयक संसद में प्रस्तुत किया 131 वां संविधान संशोधन अधिनियम इसमें महिला आरक्षण के संदर्भ में नहीं भाजपा महिला आरक्षण को मुखौटा बनाकर परिसीमन संशोधन बिल तथा केंद्र शासित प्रदेश कानून संशोधन बिल को पास करवाना चाहती थी।

राज्यसभा सदस्य रंजीत रंजन ने कहा कि संसद में जो विधेयक गिरा उसमें इस विधेयक में लोकसभा परिसीमन की सीटें 850 करने का प्रस्ताव था राज्यों में 815 सीटें तथा केंद्र शासित प्रदेशों में 35 सीटें। परिसीमन विधेयक- जिसमें परिसीमन के लिये 2011 की जनगणना को आधार बनाने की बात की गयी थी। विधेयक में पांडुचेरी, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर के कानूनों में संशोधन की बात की गयी थी ताकि परिसीमन और महिला आरक्षण विधेयक लागू किया जा सके।  सीटों के परिसीमन का भाजपा का षड़यंत्र विफल हो गया है, अतः वह महिला आरक्षण के नाम पर पूरे देश में भ्रम फैला रही है।पत्रकार वार्ता में विधायक गण अनिला भेड़िया, अंबिका मरकाम, संगीता सिन्हा, सावित्री मंडावी, चातुरी नंद, शेषराज हरवंश, हर्षिता बघेल, कविता प्राण लहरे, विद्यावती सिदार, प्रदेश कांग्रेस प्रवक्ता वंदना राजपूत, प्रीति उपाध्याय, प्रगति वाजपेयी उपस्थित थे।

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