कथा मनोरंजन के लिए नहीं मनोभजन के लिए होती है ..... चिन्मयानंद बापू जी महाराज
रायपुर. सुविख्यात परम पूज्य संत श्री चिन्मयानंद बापू जी महाराज श्री के श्रीमुख से सात दिवसीय श्रीमद् भगवद् कथा विश्व कल्याण मिशन ट्रस्ट शाखा रायपुर द्वारा की जा रही है जिसके प्रथम दिवस संध्या 4 बजे भगवान श्री कृष्ण, भगवद् गीता एवं व्यासपीठ की यजमान परिवार एवं आयोजकगणों द्वारा आरती, मंगलाचरण भजन से आरंभ हुई.
पूज्य गुरुदेव बापू जी महाराजश्री ने कहा कि रायपुर, गुढ़ियारी के अवधपुरी मैदान से की जा रही कथा का प्रसारण देश, विदेश में लाइव देखा, सुना जा रहा है. छत्तीसगढ़ की पावनधरा को प्रणाम करते हुए व्यासपीठ से मैं आप सभी श्रद्धालुओं का स्वागत करता हूं. माता कौशल्या की जन्मभूमि के निवासियों का व्यवहार भी उनके जैसा ही सरल है. अवधपुरी मैदान से श्री कृष्ण जी कथा हो रही है यह अदभूत संयोग है. यजमान परिवार, व्यवस्थापकगण, कलश यात्रा से जुड़ी महिलाओं, हनुमान मंदिर ट्रस्ट एवम् शासन-प्रशासन को इस आयोजन के लिये साधुवाद है.
महाराज श्री ने कहा कि कथा मनोरंजन के लिए नहीं मनो-भंजन के लिये होती हैं. कथा के श्रवण से मन की मलीनता दूर होती है. मन में शुद्धता आती है. लगभग 50 वर्ष पूर्व जब छत्तीसगढ़,
मध्यप्रदेश में था तब यहां के निवासी अभाव में रहते थे फिर भी खुश थे. अब सम्पन्नता तो आ गई है पर खुशी नदारत है. खुशी झोपड़ी से महल में पहुंचने से नहीं प्रभु के शरण में पहुंचने से मिलती है. जीवन में परेशानी, कठिनाई आते ही रहती हैं परंतु हमें भगवान श्री कृष्ण के जीवन से प्रेरणा लेकर जीवन जीना है जिनका जीवन बेहद संघर्षपूर्ण, तकलीफदेह था परंतु फिर भी वे हर पीड़ा, दु:ख में भी मुस्कुराते रहे.
कबीरा जब हम पैदा भये
जग हंसे, हम रोये !
ऐसी करनी करें कि
हम हंसे, जग रोये !!
अर्थात जब हम जग से विदा लें, तो हमें अपने कर्मों का पछतावा ना हो और हम हंसते-2 जग से विदा लें. हमारे विछोह से जग रो पड़े.
हमें अपना जीवन प्रभु के शरण में ही व्यतीत करना है. प्रभु भी उन्हें ही दर्शन देते हैं जो उन्हें समय देते हैं.
जब तक रहेगी जिंदगी
फूर्सत ना रहेगी काम से !
कुछ तो समय निकालो
भजलो हरी के नाम को !!
श्रीमद् भगवद् के महात्म का परिचय देते हुए आपने बताया कि बिना प्रतीति के प्रेम नहीं होता. हम मंदिर क्यों जाते हैं? आनंद की प्राप्ति के लिये. कल एक पत्रकार महोदय ने पूछा- संत-महात्मा किस राजनीतिक दल को सपोर्ट करते हैं तब हमने कह दिया जो राम के साथ हैं, हम उनके साथ हैं.
महाराजश्री ने कहा कि जब हम श्री कहते हैं तो स्वत: ही हम राधा जी का स्मरण करते हैं. श्री जी का मंदिर अर्थात् राधा जी का मंदिर. भगवान का स्मरण सतत् करना चाहिये ये नहीं कि सावन आया तभी भोलेनाथ जी का स्मरण करें, नवरात्रि में दुर्गा माता का स्मरण करें. हमें निरंतरता बनाये रखना चाहिये.
महाराजश्री ने आगे कहा कि श्रीमद् भगवद् गीता में वह शक्ति है जो पापी को भी मोक्ष प्रदान कर सकती है. अगर परिजन अपने पूर्वजों की स्मृति में भगवद् गीता का पाठ करवाते हैं तो निश्चित ही उन्हें मोक्ष की प्राप्ति होती है. इसका श्रवण, इससे ज्यादा से ज्यादा लोगों को जोड़ने का प्रयास भी पुण्य लाभ फलदायी होता है.
कथा के अंतराल में-
हरे कृष्ण-2 हरे-2, हरे रामा-हरे रामा हरे-2 !!
तुमको देखा तो ये ख्याल आया...!!
मीठे रस से भरियो राधा रानी लागे !
म्हारो करो-2 जमुना जी को पानी लागे !!
श्री कृष्ण गोविंद हरे मुरारी, हे नाथ नारायण हे वासुदेवा !!
आदि संगीतमय भजनों में श्रद्धालुगण नाचते-झूमते रमे रहे.
आरती एवम् कथा में प्रमुख रुप से मुख्य यजमान जितेन्द्र अग्रवाल सारिका अग्रवाल,सह यजमान अमित अग्रवाल, भंडारा यजमान अरविंद अग्रवाल, ओमप्रकाश मिश्रा, मयंक वैद्य, चन्द्रचूड़ त्रिपाठी, विजय अग्रवाल, रोहित मिश्रा,आशीष तिवारी, नितिन कुमार झा, महेश शर्मा, संजय मित्तल, राजेश गोयल, अखिलेश तिवारी, शैलेन्द्र तिवारी, गौरीशंकर श्रीवास, ज्योति झा, श्वेता सोनी, पार्वती शर्मा, मुक्ता शर्मा, मोनिशा पाण्डेय, रश्मि जैन, सीमा शर्मा, लक्ष्मी यादव, प्रियंका ठाकुर, विद्या शर्मा आदि शामिल रहे. कथा के पश्चात सभी श्रद्धालुओं को भोजन प्रसादी वितरित की गई.


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